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कोरबा-बांकीमोंगरा। पंचायती राज में महिला जनप्रतिनिधियों के कामकाज में पति अथवा अन्य पुरुष रिश्तेदारों की दखल को रोकने के लिए संविधान में संशोधन करने के साथ-साथ इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी अपना मंतव्य दिया है। पंचायती राज संस्थानों में जहां महिला जनप्रतिनिधियों के कामकाज में पुरुषों की दखल को अपराध की श्रेणी में लाया जा रहा है तो दूसरी तरफ नगरीय निकायों में फिलहाल इस तरह का कार्य हो रहा है।
कोरबा जिले की नवगठित बांकीमोगरा नगर पालिका परिषद में गठित प्रेसिडेंट इन काउंसिल (PIC) की बैठक को लेकर कुछ इस तरह की बातें सामने आई हैं जिसमें बैठक के दौरान PIC मेंबरों के साथ उनके पति भी मौजूद रहे। इसे लेकर दबी जुबान से कुछ लोगों ने अपनी आपत्ति की है लेकिन सत्ता से नजदीकियों के कारण उनका विरोध घुट कर रह गया है। ऐसी एक तस्वीर उपलब्ध कराई गई है जिसमें PIC की बैठक के दौरान पालिका उपाध्यक्ष के पति और एक अन्य मेंबर के नगर सैनिक पति बैठक में बाकायदा मौजूद हैं।
PIC की बैठक नगर पालिका की प्रशासनिक समिति की बैठक होती है जिसमें पालिका अध्यक्ष PIC मेंबर के अलावा पालिका के अधिकारी उपस्थित रहते हैं और पालिका क्षेत्र अंतर्गत होने वाले विकास कार्यों व अन्य कार्यों से संबंधित एजेंडा पर चर्चा कर मुहर लगाई जाती है लेकिन जिस तरह से PIC की बैठक में श्रीमती गायत्री कँवर उपाध्यक्ष के पति गोवर्धन कँवर व पीआईसी सदस्य प्रमिला सायतोडे के पति हरिचंद सायतोड़े (नगर सैनिक)बैठक में बैठे थे।
इससे इस बात को भी बल मिल रहा है कि क्या आगामी 5 वर्षों तक पत्नी के कामकाज में पति की दखल होती रहेगी,क्या उनके वार्ड के मसले व कामकाज की फ़ाइलें पति महोदय से बायपास होकर ही महिला जनप्रतिनिधि तक पहुंचेगी या फिर वह अपने वार्ड और पालिका क्षेत्र के विकास को लेकर स्वतंत्र निर्णय ले सकेंगी।सरकार से लेकर न्यायालय भी महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के पक्ष में है लेकिन यह सशक्तिकरण तब तक संभव नहीं है जब तक वे निर्णय पर स्वयं कोई फैसला न कर सकें।